इस्लाम मुसलसल जद्दोजहद सिखाता है हमे,सो किस्मत के भरोसे बैठना मुसलमान का शेवा नही,बल्कि ये सरासर कुफ़्र है..!

              हर मुसलमान को अपनी जगह रहकर जैसे भी मुमकिन हो ,दीनी दुनियावी तालीमो तरक़्क़ी व बेदारी की तहरीक चलानी होगी,तालीमी व तरबियती प्रोफेशनल इदारे क़ायम करने होंगे,जो इदारे क़ायम नही कर सकते,वो अपने इलाके,मुहल्ले,गाँव के बच्चों को वक़्त दें ताकि हमारे बच्चे बजाए वक़्त ज़ाया करने के तालीम पर तवज्जो दे।
 
                याद रखिये ये सिर्फ हमारा फ़र्ज़ ही नही है बल्कि हमारी अहम दीनी ज़िम्मेदारी भी है क्योंकि इस्लाम मे इल्म हासिल करने का दर्जा इबादत से कम नहीं...!

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