हज 2020 का पैग़ाम
मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उसने हमें बेशुमार नेमतें अता कीं.
दुनिया पर मुश्किलें अल्लाह की तरफ से इम्तेहान हैं और इबादात से ही मुसीबतों से छुटकारा मिलता है
तमाम इबादात और क़ुरबानी अल्लाह के लिए हैं. जो लोग सीधी राह पर चलते हैं उन्हीं के लिए निजात है. तक़वे से इंसान बुराइयों से बचता है और अहले तक़वा की सब से पहली ख़ासियत सब्र है.
हुज़ूर सलल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी पूरी ज़िंदगी खैर में लगा दी सब्र करने वालों के लिए खैर और भलाई की ख़ुश खबरी है..
दुनिया पर मुश्किलें अल्लाह की तरफ से इम्तेहान हैं और इबादात से ही मुसीबतों से छुटकारा मिलता है. अल्लाह हर चीज़ का पैदा करने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं. मुस्लमान हर तरह की बिदअत और ख़ुराफ़ात से दूर रहें. अल्लाह ही के हुक्म से मुसीबतें आती हैं और दूर होती हैं. मुश्किलें हमेशा नहीं रहने वाली. अल्लाह का फ़रमान है कि हर मुश्किल के बाद आसानी है.
दुनिया की ज़िंदगी मुश्किल और परेशानियों से कभी ख़ाली नहीं होती. मुसीबतें और परेशानियां अल्लाह के होने का यकीन दिलाती हैं. अल्लाह इंसान के लिए मुश्किलें नहीं आसानी चाहता है.
इस्लाम ने समाज में आपस एक दूसरे का एहतराम करने और अच्छे अख़लाक़ की तालीम दी है. इस्लाम रिश्तेदार, दोस्त और अपने करीबी लोगों का ख़याल रखने की भी तालीम देता है. अल्लाह के एहकाम पर अमल करना ही तक़वा है. क़ुरआन मजीद में है मुहम्मद सलल्लाहु अलैहि व सल्लम ही अल्लाह के आखिरी नबी हैं.
नबी करीम सलल्लाहु अलैहि व सल्लम की तालीमात पर अमल करना ही ईमान है. क़ुरआन में है कि मामूली मुसीबत का मक़सद बड़े अज़ाब से आगाही है.
क़ुरआन में अद्ल और इन्साफ़ की तालीम दी गई है
इस्लाम किसी भी क़िस्म के फ़ित्ने को फैलाने से रोकता है. इस्लामी तालीमात हर उस चीज़ से बचने का दर्स देती है जो इंसानी सेहत के नुकसानदेह हो. अल्लाह ने अम्बिया को नफ़्स की साफ़ सफ़ाई के लिए भेजा. अल्लाह ने मर्द और औरत को एक दूसरे का एहतराम करने और ख्याल रखने की तालीम दी है. इस्लाम ग़रीब और कमज़ोरों के हुकुक़ की हिफाज़त करने का भी दर्स देता है.
नबी करीम सलल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि जिस जगह वबा फैली हुई हो वहाँ न जाओ और जहां वबा फ़ैली हुई हो वहाँ के लोग कहीं न जाएं.




Comments
Post a Comment
Thank you