लौट आओ अपने रब की तरफ और उसके फरमाबरदार हो जाओ इससे पहले की तुम पर अजाब आ जाए,
और फिर तुम्हारी मदद भी ना की जा सके!
और पैरवी करो इस बहतरीन (कुरआन की) जो तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारी तरफ नाजिल की गई है
इससे पहले की तुम पर अचानक अजाब आ जाए ओर तुम समझ भी ना सको...!
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Thank you