लहू नालेन से जारी रहा मगर नहीं दी किसी को बद्दुआतक,
और कहा फरिश्तो ने आप हुकुम तो करे पहाड़ो को मिला दिया जाये,
फिर जवाब ये आया, मै रहमत बनकर आया हूँ जहमत नहीं..!
(ऐसे थे हमारे नबी स.त.अ.व.)

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