किसी भी कौम और मुआशरे की कामयाबी के लिए जरूरी है उनके दरमियान में हमेशा ऐसे लोग पैदा रहें जो हकीकत-ओ-सदाकत की कसौटी पर कौम-ओ-मिल्लत के दरपेश मसायेल को दुनिया के सामने रख सके और उस सच से दुनिया को आशना करवाते रहें जिन पर कौम के जालिम हुक्मरानों के जरिये पहरेदारी निजाम कायम कर दिए गये है। वो उस राज को फाश कर सकें कि जिनके मुताल्लिक कौम के सरमायदारों ओर हुक्मरानों के दरमियान ये मुआहेदा हो चुका है कि हम इस कौम-ए-मिल्लत की इज़्ज़त-ओ-अज़मत और इसके जाह-ओ-जलाल की फिक्र न करते हुए एक ऐसा सरमायादारान निजाम कायम करेंगे जिनमे हमारी नस्ल को तालीम भले ही न मिले लेकिन चैन-ओ-सुकून और आराइश-ओ-जेबाईश की जिंदगी जरूर बसर कर सकेंगे।
आई.बी.आर. फाउंडेशन की शुरुआत कौम-ओ-मिल्लत के इन्ही जाबिर (तानाशाही) हुक्मरानों के खिलाफ एक तहरीक (Revolution) की शुरुआत है जिसका मकसद नौजवानों की जहनी नाशोनुमा ओर उनकी आवाज को एक प्लेटफॉर्म अता करना, एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहाँ से वो अपनी आवाज को इस कौम के बच्चे-बच्चे तक पहुंचा सके। जहाँ वो ये देख सके कि एक छोटी सी कोशिश से ही बड़े कारवां तरतीब दिए जा सकते है और मसनद-ए-शाही पर बैठे जालिम हुक्मरानों के इरादे किस तरह जेरे-ए-खाक मिलाये जा सकते है।
शुक्रिया मेहरबानी


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Thank you